हल्द्वानी- महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के जयकारों से गूंजा छोटा कैलाश धाम ,उमड़ा भक्तों का सैलाब ,

हल्द्वानी/भीमताल। जिले भर में महाशिवरात्रि का पर्व आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शिव मंदिरों में सुबह से ही जलाभिषेक करने वालों की लम्बी कतारें लगी हुई हैं।
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान भोलेनाथ की तपोस्थली शिवधाम छोटा कैलाश में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। यहां एक दिन पहले से ही श्रद्धालुओं के आने का क्रम शुरू हो गया था , देर शाम तक लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर पूजा अर्चना और जलाभिषेक किया।

जय-भोले, जय-शंकर, जय-भंडारी एवं जय शम्भूनाथ के जयकारों से यहाँ की पहाड़ियाँ शिवमय हो उठी। छोटा कैलाश मन्दिर में दूर दराज से आए भक्तो के लिए उचित व्यवस्था की गई। पेयजल के साथ-साथ प्रसाद तथा भंडारे का आयोजन भी किया गया था।

भगवान शिव और माता पार्वती ने यहां किया था रात्रि विश्राम

हल्द्वानी। भीमताल ब्लॉक अंतर्गत कैलाश पर्वत शिवभक्तों की आस्था का प्रतीक है। यह पर्वत गौला (गार्गी) और कलसा नदियों के बीच में घिरा हुआ है

महाशिवरात्रि के दिन यहां भारी संख्या में देश- प्रदेश के श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन को आते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती ने छोटा कैलाश पर्वत पर रात्रि विश्राम किया था। तभी से शिवलिंग यहां स्थापित है। खुले आसमान में विराजमान शिवलिंग की पूजा होती है।

इन दो मार्गों से पहुंचा जाता है मंदिर

छोटा कैलाश मंदिर तक दो मार्ग से पहुंचा जाता है। एक मार्ग अमृतपुर से होते हुए बानना बबियाड़ से है तो दूसरा मार्ग जंगलियागांव भीमताल से जाता है। दोंनों ही मार्ग से भक्तजन भटेलिया पहुंचते हैं। भटेलिया के बाद श्रद्धालुओं को 3-4 किमी की चढ़ाई चढ़नी होती है। वहीं छोटा कैलाश विराजमान है।

मंदिर के विषय में मान्यताएं-

छोटा कैलाश मंदिर के विषय में मान्यता है कि सतयुग में भगवान शिव एक बार यहां आए थे भगवान शिव और माता पार्वती ने इस पर्वत पर विश्राम किया था। महादेव के यहां पर धूनी रमाने के कारण ही तभी से यहां अखण्ड धूनी जलायी जा रही है। मान्यता है कि यहां पहुंचकर शिवलिंग का जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। (फोटो/ वीडियो- यतीश पाण्डे)

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